Tuesday, June 16, 2009

जय बाबे की !!

क्या आप किसी धार्मिक स्थलों का दौरा करने जा रहे हैं ?? भाई माताजी को मेरा भी नमन कहना,बालाजी को प्रणाम, साईं बाबा को सलाम, क्या करूँ मेरा जरासा जाने का मन नहीं हो रहा, अरे भाई आप जहां जा रहे हैं बड़ी भीड़ है, वहाँ लम्बी कतार होगी, पुरे दिन से भूखे प्यासे खड़े लोग होंगे, न जाने कितनी बिमारियों वाले, कितने प्रेतों के सताए, दुखी मानव का एक ही सहारा है| श्रद्धा से भरे लोग, प्रेमाश्रुओं की झड़ी लगाते जाते हैं, जब रास्ता तय करते हैं तो, पहुँचने की जल्दी,अब ख़ुशी का पारा सातवें आसमान पर है अब तो पहुँच गए माता के धाम, मैया रानी को बड़े स्नेह से बड़े प्यार से निहारूंगा चरणों में लोटूंगा,लोटिया लोट हो जाउंगा | लेकिन ये क्या इतनी लम्बी लाइन, इस लाइन मैं आज नंबर आयेगा मुश्किल है| क्या करूँ ?? | मैं: हेल्लो भाई साहब वो उधर देखिये छोटी लाइन उसमे लगिए | आप: ओह धन्यवाद ! पर वहाँ बाकि लोग क्यों नहीं जाते?? | मैं: अरे भाई वो लाइन वी आई पी है | आप: ओह !! | मैं: वड्डे वड्डे लोगां की लाइन है भाई !!| आप: ओह क्या करूँ मैं तो बड़ा आदमी नहीं हूँ ?? | मैं: क्या बात करते हो ? बड़े बनने मैं कितना वक़्त लगता है यार पांचसो का पत्ता है? | आप: हाँ मिल जायेगा ! | मैं: तो बन गए बड़े आदमी वो जो पंडा घूम रहा है उससे कान्टेक्ट करो !
आप: हेलो पुजारीजी !! | पुजारी: क्या बात है? आप: ज़रा उस लाइन मैं मेरी भी व्यवस्था कीजिये न ?पुजारी: अरे भाई वो बड़े लोगों की लाइन है | आप : मैं भी छोटा नहीं हूँ ये देखो पांच सो का पत्ता |
पुजारी : आइये आइये |
हूँ आखिर दरसन हो गए माताजी के भाई साहब आपको चरणों मैं लोटे की नहीं | आप: नहीं भाई वहाँ तो ठीक से दर्शन भी नहीं करने देते कितने जोश से गया था ??
मैं: ओह लगता है आप पहली बार गए थे ?? क्यूँ क्या घर पे माताजी, बालाजी, साईं बाबा आते नहीं क्या | आपसे कोई माताजी बालाजी की कोई दुश्मनी है? जितना प्रशाद चढाते हो वही प्रसाद फिर बाज़ार मैं बिकता है| उशी प्रसाद से कितने आलसी बाबा मजा करते हैं, भाई मेरी बाबाजी लोगों से कोई दुश्मनी नहीं है, पर वो जब बाबाजी बन ही गए हैं, तो एक भी कोई मुझे सच्चा बाबजी बता दो जिसको मैं गौतम बुध्ध, साईं बाबा, या फिर कोई सच्चा साधू जिसको देखने से आत्मा प्रेम विभोर हो उठे | जिसकी आत्मा मैं इतनी शांति और शकुन हो की दृष्टी मिले तो निहाल हो जाऊं, प्रेम से आत्मा का अहसास हो मन हल्का हो कर उड़ने लगे | अगर नहीं है तो फिर इससे अछे मेरे बाबाजी हैं, पिताजी के बड़े भाई जो प्यार से निहारते हैं !!

Thursday, June 11, 2009

थूक वाले बाबा

साधू महात्माओं का बढ़ता संसार अजीबो गरीब बाबे, कामख्या गुवाहाटी मैं अम्बुवासी मेले में एक बाबा मुझे मिले जो की चिवंगुम वाले बाबा के नाम से जाने जाते थे, वो चिवंगम चबाते रहते थे और सबसे कहते थे की चिवंगम खाने से तन और मन दोनों की व्याधियां मिट जाती हैं, बाबा बनने के पीछे कुछ कारण छिपे होते हैं,आइये एक बाबा का किस्सा बयाँ करता हूँ!कोई फ़िल्मी स्टार आने वाला था, बहुत भारी भीड़ लगी थी, उसी भीड़ मैं एक बेरोजगार युवक जिसके दाढ़ी काफी लम्बी लम्बी थी,अपने दोस्त के साथ खडा था, जिसको खैनी खाने की लत थी, और खैनी खाकर कहीं भी थूक देना उसके लिए आम बात थी, तो आदतन उसने थूका और थूक पास मैं खड़े नौजवान पर जा गिरा और नोजवान भी ऐसा तगड़ा हट्टा कट्टा की अगर थप्पड़ रसीद कर दे तो डॉक्टर के पास इलाज न मिले, अब ऐसे व्यक्ति पर थूक गिरना मतलब सरे आम मुसीबत को गले लगाना था,वही हुआ नौजवान गुस्से से फुंफकारता हुआ, दढियल की तरफ लपका और गिरेबान को ऐसे पकडा जैसे कसाई बकरे को पकड़ता है, दढियल लट्पटाने लगा, नौजवान गुस्से से बोला : क्यों बे थूकने से पहले देख नहीं सकते?? अब दढियल क्या बोले गिरेबान छूटे तो हलक से आवाज निकले, पर उसी समय दढियल के दोस्त ने मोर्चा संभाला और बोला : अरे मुर्ख नौजवान क्या कर रहे हो इतने पहुंचे हुए महात्मा को इस कदर बेइज्जत कर रहे हो? नौजवान थोडा चकराया बोला: काहे का महात्मा ? दढियल का दोस्त बोला:अबे ये थूक वाले बाबा है जिसका कल्याण करना होता है बिना पूछे थूक देते हैं, लेकिन नौजवान कहाँ मानने वाला था बोला : आज ऐसा इलाज करूँगा की थूकने का बोलने से भी इनके गले से थूक नहीं निकलेगा, बाबाजी बनते हैं? अब इसी धक्का मुक्कि में दढियल को नौजवान के पाकेट मैं रखी लॉटरी की टिकट दिख गयी, अब दढियल बोला; उहू हु हु हु हु बच्चा तुम्हारी बहुत जल्दी एक करोड़ की लाटरी लगने वाली है, अब ये बात नौजवान को जम गई वो सोचने पर मजबूर हो गया की आखिर इसको कैसे पता चला की मैंने प्लेविन की एक करोड़ की लाटरी ले रखी है चमत्कार को नमस्कार है एक करोड़ की लाटरी आ रही है अगर बाबाजी को नाराज कर दिया तो आती हुई किस्मत रोक देंगे बाबा, नौजवान का गुस्सा ऐसे गायब हो गया जैसे गुस्से मैं भरी हुई माँ का गुस्सा अपने बच्चे को चोट लगने से गायब होता है, नौजवान दढियल के चरणों मैं लोटते हुए कहने लगा : बाबजी मुझे माफ़ कर दीजिये मैं अज्ञानी,मुर्ख नासमझ, नादान,परेशान,आपकी महिमा को समझ नहीं पाया, अब दढियल ने थोडी चैन की सांस ली, काफी भीड़ इक्कठी हो गयी इस माजरे मैं,नौजवान कहता रहा : बाबाजी मेरे एक करोड़ मत रोकिये उन्हें आने दीजिये, मैं बहुत गरीब आदमी हूँ बाबाजी, एक बार और थूक दीजिये बाबाजी एक बार और,दढियल बड़ी शान से बोला: घबरा मत बच्चा हम तो दुनिया के मान अपमान से परे हैं, आकथू!!!! और दढियल ने बची हुई खैनी का सारा झोल नौजवान के ऊपर उडेल दिया, नौजवान : मैं धन्य हो गया बाबाजी मैं धन्य हो गया, अब बाबाजी ने सोचा अब यहाँ से कल्टी मार लेने में ही भलाई है, दढियल बोला: ठीक है बच्चा अब जाओ और देखो दो दिन नहाना मत, (खैर सब बाबाओं की कुछ न कुछ अलग विशेसता तो दिखानी पड़ेगी न भाई) अब नौजवान चला गया, दढियल और उसका दोस्त अपनी खैर मनाते हुए घर की और चले की भाई जान बची तो लाखों पाए, बात को तीन दिन ही बीते थे की उस नौजवान की संजोग से सचमुच एक करोड़ की लाटरी निकल पड़ी, अब तो नौजवान दढियल को ढूँढ़ते ढूदते दढियल के घर पहुँच लिया, अब दढियल ने दूर से देखा तो झट पहचान गया, पहचानना तो था ही मुसीबत को कोई कैसे भूल सकता है,दढियल ने सोचा अब खैर नहीं ये आज बाबाजी बना के छोड़ेगा, इससे पहले की दढियल कुछ कहता नौजवान दंडवत करते हुए बोला : धन्य हो बाबाजी आप धन्य हो,मुझ गरीब का आपने कल्याण कर दिया बाबाजी मेरी लोटरी लगा दी,मुझे एक करोड़ रुपैये मिले हैं बाबा और मिलते ही मैं आपके पास आया हूँ, अब दढियल ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थिति को काबू मैं किया बोले: उहू हु हु हु हु बच्चा हमें पता है, नौजवान बोला: बाबाजी आपके भंडारे मैं दस लाख चढाना चाहता हूँ ना मत कीजियेगा नहीं तो मेरा दिल दुखेगा, दढियल की आंखें चमक गयी, खैनी को मन ही मन धन्यवाद देता हुआ बोला: देखो बच्चा माया मोह से हम बंधे नहीं है पर तुमने हमें अपने बस कर लिया तो मना भी नहीं कर सकते भगवन तो भक्तों के बस होते हैं,जब तुम इतनी जिद ही कर रहे हो तो दस नहीं ग्यारह लाख चढा दो, शुभ होते हैं, नौजवान ख़ुशी से झूमता हुआ: बाबाजी आपने मेरी विनती स्वीकार करके मुझ पर एक और अहसान किया है, कहकर चरणों में ऐसा लेटा की उठने का नाम नहीं ले रहा प्रेमाश्रुओं की झडी लग गयी वातावरण पूरा भक्तिमय हो उठा, जोर से टिली मार के नौजवान ने जयकारा लगाया :थूक वाले बाबा की जय!!अब आस पास के लोगों मैं भी श्रद्धा जगी और थुकवाले बाबा के जयकारों से वातावरण गूंज उठा, अब क्या था सब बाबा जी से थुकवाने लगे, कईयों के काम संजोग से बन जाते, बाबाजी का चर्चा दूर दूर तक फैलता गया, बाबाजी और बाबाजी का दोस्त दोनों चढावे से मौज करने लगे, दूर दूर राज्यों से लोग आने लगे बाबाजी का पर्चा लोगों को रास आ रहा था पर इतना थूक कहाँ से लायें, अब तो बाबाजी थूक को वेस्ट भी नहीं कर सकते थे, रात को सोते वक़्त का थूक लोटे मैं जमा करते, पान खा कर लाल पिक भी डब्बियों मैं पेक करते,सोच के समय का थूक भी डब्बियों मैं जमा करते, अब जो दूर से आते थे वो डब्बियों वाला थूक ले कर जाते थे, कोई पूछता महाराज ये लाल थूक कोनसे कस्ट निवारण करता है, बाबाजी समझाते: बच्चा ये लाल थूक पानासन थूक है इससे दरिद्रता नस्ट होती है और घर मैं लाल कागज में रखने वाला सामान(सोना) आता है! और ये जो सफ़ेद वाला थूक है न ये सोचासन के समय का थूक है इससे कब्ज, एसिडीटी, और उदर के सारे कस्ट मिटते हैं! भीड़ इतनी की पूछो मत लोग थुकवाने के लिए उतावले अब माइक पे अनाउंस भी हो रहा है: कृपया लाइन से थुकवाने आते रहे, जिन्होंने थुकवा लिया है वो आगे बढ़ते रहें, एक आदमी एक बार ही थुक्वाए, माता बहनों को पहले थुकवाने देवें, बच्चों को थुकवाने के लिए गोदी मैं ले के रखें, और जो अपने साथ अपने लोगों को नहीं ला सके उनके लिए थूक की डब्बियों की व्यवस्था की गयी है ड्ब्बीयाँ ले जावें, और कृपया बाबाजी को अच्छी खैनी चढावें, थोडी देर रुक जाइये बाबाजी खेनासन कर रहें हैं (खैनी खा रहें हैं), बस अब क्या था बाबाजी से थुकवाने चुनाव के समय नेता लोग भी आने लगे,बाबाजी कहते असली थूक तो आप के लिए ही है,जनता बेचारी भोली है ओरिजनल थूक तो आप लोगों पर थूकता हूँ !!!आक थू!!!!!

Tuesday, May 5, 2009

"महाराज चिरक देवजी "

राजस्थान जिस्यो फुटरो नाम बिस्यो ही फुटरो ठाँव पण देवी देवतां गी लम्बी कतार जै कंप्यूटर मैं भी नाम लिखाण बैठां तो नावड़ं कोनी!

कोई शुभ काम होवंतो होवे तो सगळ देवी देवतां ने याद करना जरूरी हैं! जे एक ही भूली चुकी मैं कोई देवता छुट्ग्यो तो बो किन्न्गेई मुंडे बोलतो देर कोनी लगावे!और देवी देवता इता हैं क कम्पुटर में भी लिखन बैठ ज्यावां तो नावाड़ें कोनी, और नित नया देवता आवण लगरया हैं! एक इस्ये ही देवतागी मैंने याद आ री है "महाराज चिरक देवजी "तो हुयो इयान की मेघवालनी आपगे टाबर ने गोदी मैं लेगे ब्राह्मणा ग गाँव गई! अब टाबर गो पेट खराब हो जियां ही मेघवालनी मिन्दर क आगें गई टाबर चिरक दियो, शुद्ध भासा मैं कवुं तो टट्टी बैठ दियो! इतेने मेघवालनी देख्यो मिन्दर मिया पंडितजी चढावे गा पिस्सा गिनता ही आ रयाँ हैं! मेघवालनी सोच्यो हे भगवान् अब के होसी एक तो जातगी मेघवाल दुसरो टाबर टट्टी बैठ दियो और बोई मिन्दर ग आगें! एतो सेई मेधा रलग्या, जे हुवे तो कोई बुद्धि लगा, अब माथे गा लोटिया चस्या! जोरस्युं टिली मारी :- हे महाराज थारी जय हो ! जय हो चिरक देवजी महाराज की जय हो ! पंडितजी देख्यो ओ के सांग है! पंडितजी हौले हौले कने गया, बोल्या कुन है बाई !! मेघवालनी भोड हला हला बोली:- परगटग्या परगटग्या चिरक देवजी परगटग्या!!! आंगळी स्यूं चिरको दिखावंती बोली बो देखो रात ही सपनो आयो क इं गाँव मैं कलियुग को अवतार चिरक देव परगट होसी और बो मने दिखसी! प्रभु इच्छा स्यूं मैं आई और दिख्ग्यो मैं धन्य होगी !! पंडितजी गो इतो सुणनो हो की दंडवत करण लागग्या और गाँव मैं ढ़ीन्ढ़ोरो पिट दियो अबं गाँव उमड्यो, लुगायां गीत बढावा गावंती ही आई !

बात दूर दूर ताई पूगी दूर दूर गांवां स्यूं लोग आया, कई पैदल यात्र्याँ का दल आया, अबं लोगाँ सोच्यो क भाई मंदिर बनायो जावे बडो हवन कार्यो जावे, बड़े बड़े साधू महात्मा ने बुलाया गया, बात मीडिया मैं पतों लगी, सगला समाचार चैनल हाळा कैमरा ले ले गे आग्य्गा ,अब लाग्या बीं चिरक की फोटुवाँ लेवन न, कई दिना रो हुने स्यूं कल्डो हुग्यो, पण भाई चिरक देवता तो चिरक देवता ही हैं कल्डो हुवो चाहे कंवलो हो! लोग हाथ लगा लगा सर ग लगाँव, अब टीवी चंनेलाँ पर एक ही समाचार "कलियुग के अवतारी महाराज चिरक देवजी" प्रगत हुए आइये ले चलते है आपको उस जगह जहां ये कलियुगी अवतार श्री महाराज चिरक देवजी प्रगट हुए हैं, सीधे प्रसारण मैं चिरका दिखा रहे हैं , ख्याति पुरे संसार भर मैं फेल गयी, बहुतों की मनो कमाना पूरी हुई, अब चिरक चालीसा , चिरक मंत्र , चिरक स्तुति, चिराकनान्दजी की आरती, वगेरह वगेरह सभी बने, लोग चिरक देव की लहरी , चिरक देव का बेज, चिरक देवजी का मादलिया लगा लगा के घूम रहे हैं,

Sunday, May 3, 2009

मुरारी उल्लू ही है !!!!

नमस्कार,
अपना नाम करने के चक्कर में मैंने अपने ही ऊपर लेख लिख कर टेलेग्राफ पेपर मैं भेजा,और प्रकाशित भी हुआ,पर जिस दिन मेरा लेख प्रकाशित होना था, उसी दिन उल्लू पर भी लेख प्रकाशित हुआ,अब क्या बताऊँ की क्या हुआ, मेरे नाम की जगह उल्लू का और उल्लू के नाम की जगह मेरा हो गया राम जाने क्या हेर फेर हुई, खैर लेख कुछ इस तरह था!
उल्लू !! ये नाम सुनते ही लोगों के होठों पर हंसी अपने आप ही आ जाती है, ये उल्लू पिछले २५ साल से कॉमेडी करता आ रहा है, देखने मैं बहुत शांत पर इसकी फितरत मैं कॉमेडी कूट कूट के भरी हुई है, बस मुह से बात निकली नहीं की कॉमेडी बन गयी! और भगवान् ने इस उल्लू को गला भी ऐसा बख्शा है की बोलते ही लोगों को हंसी आ जाये, जब भी ये उल्लू कहीं गमगीन माहोल देखता है धीरे से अपनी बात सरका देता है, कई जगह तो ये उल्लू पिटते पिटते बचा, एक बुजुर्ग की मौत पर जहां मातम हो रहा था, उल्लू बोल पड़ा "जब जिन्दा था तो उसको मारने की जल्दी थी अब मर गया तो हाय क्यूँ मर गया अब किसको कोसेंगे " लोग बरस पड़े, पर सबको मालूम था की बेचारा आदत से लाचार है ये उल्लू !!
ये लेख मेरे लिए प्रकाशित हुआ, और दूसरी तरफ उल्लू पर जो लेख लिखा गया वो इस तरह था!
"मुरारी" नाम सुनते ही शारीर मैं कंप कम्पी सी दौड़ जाती है, मुरारी रात को ही निकालता है,लोगों का मानना है की मुरारी बहुत बहुत मुर्ख होता है इसीलिए ये कहावत बन गई की मैंने तुम्हे मुरारी बना दिया, या तुम तो बिलकुल ही मुरारी हो, मुरारी का पठ्ठा,लेकिन धर्म ये मुताबिक ये लक्ष्मी की सवारी भी है लक्ष्मीजी की फोटो के नीचे बैठा मिलेगा मुरारी ! मुरारी की बड़ी बड़ी आँखें बहुत डरावनी होती हैं, आंखें जीतनी डरावनी है चेहरा भी चकोर और भयानक है, और आवाज तो इतनी भयानक है की सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते है,

तांत्रिक क्रिया मैं मुरारी की अहम् भूमिका बताते है, कहते हैं मुरारी की खोपडी मैं काजल बना के लगाया जाये तो सम्मोहन दृष्टि प्राप्त होती है, और मुरारी की हड्डियों की राख़ का सुरमा आँखों मैं लगाया जाये तो भुत भविष्य सब दिखाई देते हैं, इसीलिए तंत्र क्रिया करने वाले इनके जान के पीछे पड़े रहते हैं,
अब ये लेख छपने के बाद लोग बन्दूक ले कर मेरे पीछे पड़ गए हैं,कईयों ने तो घरवालों को अडवांस पैसे दे दिए की मरने के बाद खोपडी और हड्डी हमें दीजियेगा.दुसरे दिन उसी समाचार पत्र मैं माफीनामा भी प्रकाशित हुआ, कुछ इस तरह.कल जो दो लेख हमने प्रकाशित किये थे उल्लू के ऊपर और मुरारी के ऊपर दरअसल जो मुरारी था वो उल्लू था, और जो उल्लू था वो मुरारी था, अब लोगों की समझ मैं आगया की मुरारी उल्लू ही है !!!!

Saturday, May 2, 2009

आदमी को पूंछ


कितनी इसके काम आयेगी, एकदम इसको जाच जायेगी!!
मेरी बात को मानले भगवन,
आदमी को पूंछ दे दे,बदले मैं चाहे मूंछ लेले !!

गधे की दे दे लोमड़ की दे दे, कुते दे दे बिल्ली की दे दे!!
मेड इन कलकाता की दे दे नही तो चल दिली की दे दे !!

दफ्तर मैं इसे हिला हिला के, अपने बोस को खुश कर लेंगे !!

गुस्से मैं बाबु जब होंगे , अन्दर इसको पुस कर लेंगे !!

बातों से जो बात न बने ,उसका हल ये पूंछ दे दे !!

मेरी बात को ......................

भांति भांति के पूंछ वाले हो जायेंगे यहाँ आबाद,

जातिवाद फैला पहले से फिर फेलेगा पूंछ वाद !!

राजनीती को नया मशाला नै दिशा और उंच दे दे !!

मेरी बात को ..................

जगह जगह पर नरसंहार मानव बना पशु का अवतार !!

मानवता कहीं नजर न आए ,जानवर सा करे बर्ताव !!

कम से कम इस मानव को तू, जानवर का लेबलदे दे !!

मेरी बात को मानले भगवन आदमी को पूंछ दे दे !!!!!!

दहीरो कुल्हड़ियो





गुरूजी पढॉवता गांव में रोटड़ी आंवती ठांवम!!
बिन्या चोपड़ी लुखी पाखी, गुरूजी कौर तोड़र चाखी !!
जग्याँ जग्याँ स्यूं ल्यायो है बळैड़ी,सागे मेधाबरी किंकर रर्ळैड़ी !!
टीँगरो बेसुरी हैं थारी मावां अबं बापरो सीर खांवा !!
अबकाळे भुरियो कियां आवे,हाथ मैं दहिरो कुल्हड़ियो ल्यावे !!
हौळे हौळे रोट्ड़ीरी कौर खादी,भुरियो बोल्यो गुरूजी दहीरो कुल्हड़ियो दिरायो है दादी !!
अरे भूरिया दादी कियां टूठ्गी, गुरूजी दही ने गन्डकड़ी उन्ठ्गी!!
बळी बळज्याणी दादिरी सुर ही जकी रोट्ड़ी और लीनी चूर !!
अरे जिनावर तने तो ठा हो, हाँ गुरूजी म्हारे घरे गंडकॉ गो ऐंठेड़ो कुण खा हो !!
सुणता हीं गुरूजी को कोवो छुट्ग्यो कुल्हड़ियो फेंक्यो फेंकता ही फूटग्यो!!
बळी बलज्याणी राफां जुतसी, रोंवतो ही बोल्यो भुरियो अबं दादी रातने क्यामे मुतसी!!