Wednesday, August 27, 2014

साईं बाबा जाएँ तो जाएँ कहाँ ??

आखिर साईं बाबा का चमत्कार झेल चुके लोग इस स्थिति में आ गए की समझ नहीं आता राम को पूजें या साइ को |
अब शंकराचार्य का कहना की साईं बाबा भगवान् नहीं है ..तो साईं बाबा ने कब कहा की वो भगवान् है ? यहाँ तक की किसी संत ने अपने आपको भगवान नहीं कहा | 
आखिर अब ये सवाल कैसे उठा? इतने दिन सब शंकराचार्य और मठाधीश कहाँ थे ?? 
कल तक साईं नाम का जप करने वाले आज उन्ही के नाम पर गाली गलोज करने से बाज नहीं आ रहे है |
कोई उन्हें मुस्लिम तो कोई हिन्दू ठहरा रहा है | मुर्ख पब्लिक इनकी चक्कर घिन्नी में फंस के तय नहीं कर पा रही की किसे पूजें ? ये सवाल इसलिए तो नहीं उठा की शन्कराचार्य जी की कमाई में कुछ कमोबेश होने लगा ?
बिलकुल बात तो यही है या फिर साईं के पुजारियों की चांदी होते देख शंकराचार्य के मन में भी लालच आ गया |
मैं कोई साईं भक्त या राम भक्त नहीं हूँ | पर एक साधारण समझ रखने वाले इंसान के मन में ये बात जरुर आती है की जिन लोगों ने साइ के प्रत्यक्ष चमत्कार देखे हैं( चाहे वे संजोग ही रहे हों ) उनके मानस पटल से  उसे कैसे उतारा जा सकता है | वही कट्टर भक्त है |
साईं बाबा के ही नहीं ललू पंजू कोई भी बाबा हो अगर किसी का काम कहीं न बने और निर्मल बाबा के दरबार में बन जाए तो क्या कहिएगा ...?? आप चाहे जो भी कहिये बन्दा तो निर्मल बाबा के चरण धो धो के पिएगा |
हालांकि ये कोई बाबा देव या भगवान् का नहीं बल्कि उसकी आस्था का (विल पॉवर) से या संजोग से होता है |
पर जन जन को कौन समझाए ??जीसस क्राइस्ट ने भी कहा की अगर तेरा विस्वास मुझमे है है तो तूं अवस्य स्वस्थ होगा | 
उसपर भी कुछ मुर्ख इंसान भगवान् को ही धन अर्पित करते है सारा लफड़ा यही से शुरू होता है...उनके इसी धन और स्वर्ण छत्रों के चढाने से ही साईं और राम का युद्ध है |
मंदिर जाओ साइ धाम जाओ श्रध्दा से हाथ जोड़ कर आ जाओ | चढ़ावा और दिखावा मत करो फिर न तो करोड़ो साधुओ की जमात होगी न साईं होगा न निर्मल बाबा होगा |