Wednesday, November 25, 2009

आर जे "अक्स" उर्फ़ मुरारी की महफ़िल "मिष्टी महफ़िल" !!

आइये दिलों को दिलों से मिलाता कार्य क्रम मिष्टी महफ़िल सुने|
जिसका समय है रविवार रात्रि ७ बजे से रात्रि १० बजे तक |
जिसे दिलकश अंदाज में पेश किया है आर जे "अक्स" उर्फ़ मुरारी उर्फ़ मैंने !!!
ये कार्य क्रम काफी लोकप्रिय हो चुका है !
पूरी तरह से हिंदी में होने बावजूद एक ऐसे प्रान्त में जहां लोग हिंदी बोल नहीं पाते !
अच्छी तरह से समझ नहीं पाते !अपने झंडे गाड़ चुका है !
इस शो में सिर्फ प्यार मोहब्बत और रिश्तों की बातें होती हैं आपके सुझावों का स्वागत है!
अपने कार्य क्रम को बेहतर बनाने के लिए आप सब की राय अत्यंत आवश्यक है|
अत: कृपया आपको जो भी त्रुटी लगे जरुर बताएं आपके विचार मेरे लिए बहुमूल्य हैं !!!

Monday, November 23, 2009

मोटापा कम करने राम बाण!!! बिलकुल फ्री!!! dr.jhatka.

अब देखिये मोटे शरीर के चलते क्या क्या सहन नहीं करना पड़ा ???
आज कल जिम्नेजियम का ज़माना है, तो साथ के दोस्तों ने कहा यार कुछ मोटापा कम करले|
कुछ कसरत वसरत किया कर | बाबा रामदेवजी के योगासन से अपनी विशाल कया को मानवो में मिलती जुलती बना |
मैं बोला : अरे भाई अब इतनी बड़ी काया से कोई योगासन करे तो कैसे करे |
दोस्तों ने सलाह दी डाक्टर का सहारा ले कुछ तो शरीर मेल में आयेगा |
पहुँच गया मैं डाक्टर झटका के पास और अपनी सारी व्यथा बयान करदी |
डाक्टर झटका भी शायद समझ गया की फोकटिया पेशेंट हैं बोला: एक काम करना मैं तुम्हे दवाई नहीं दूंगा |
मैं बोला: तो क्या दोगे डाक्टर साब !!!
डाक्टर झटका साब बोले : देखो तेरी हैशियत नहीं की दवाई खरीद के खाओ इसलिए एक सस्ता सा उपाय है |
मैं खुश होता होअया बोला: तो डाक्टर साब देर क्यों तुरत बाताइए आज से शुरू करता हूँ |
डाक्टर झटका बोला: दो सुखी रोटी सुबह खाना और दो सुखी रोटी शाम को !!!
मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था इतना सस्ता उपाय मैंने झट से पूछा : अब डाक्टर साब ये भी बता दीजिये की ये दो सुखी रोटी खाना खाने के बाद खानी हैं खाना खाने से पहले!!!

Thursday, November 19, 2009

गाँव की रित नहीं बदली !!!

अलबेलाजी की बात पर एक बात याद आगई | हमारे चुन्नी भैया भी खाने के बड़े शौक़ीन थे |पर घर में रोज रोज कौन उनके लिए पराठे बनाए ,खीर पूरी जिमाये (खिलाये)|
तंग आकर ससुराल चले गए अब जंवाई जी आये हैं तो खातिर दारी तो होनी ही है|

कभी मालपुए, कभी खीर जलेबी, कभी दाल का हलुवा नित नए भोजन|ससुराल में किसी के घर मिलने जाते तो भी अच्छा अच्छा खाना खूब खातिरदारी|चुन्नी भैया तो ससुराल में रम गए १० दिन तक स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ लेते रहे|

फिर घर की याद आई तो घर आ लिए | अब घर आते ही खाना परोसा गया,वही सुखी बाजरे की रोटी और दही की कढ़ी|

चुन्नी भैया मुह बना कर बोले: सब जगह रित बदल गयी पर यहाँ वही रुखी सुखी ही चलती है |

Tuesday, November 17, 2009

My laughter unlimited show!!!

सभी ब्लॉग जगत के साथियों को मेरा प्यार |
आज एक पोस्ट अपने प्रोग्राम की लगा रहा हूँ! जो हर शनिवार सुबह १० बजे से दोपहर एक बजे तक हो है !
उपयोग में लिए गए जोक्स आपही के हैं! कोई राज भाटियाजी का तो कोई किसी और का! इसको डाउनलोड करके सुनने के लिए यहाँ जाएँ | http://www.archive.org/details/LaughterUnlimited14.11.09.

Wednesday, November 11, 2009

आदमी को पकाने की विधि !!!!

आइये आज आपको आदमी पकाने की विधि बताते हैं !
हाँ तो सबसे पहले आदमी का चुनाव करें | आदमी का चुनाव करते समय आप एक बात का अवश्य ख़याल रखें की जिस आदमी को आप पकाना चाहते हैं| वो कैसा है ! यानि आदमी दो प्रकार के होते एक जिनके पास कुछ काम धाम नहीं है, मंद बुद्धि ! दुसरे वो जो बहुत बीजी रहते हैं और बुद्धि जीवी होते हैं |
अगर आप जल्दी पकाना चाहते है तो किसी बीजी आदमी को लीजिये ! अगर किसी निठ्ठले को लेंगे तो उलटा भी हो सकता है | पकाने की बजाय खुद पक जायेंगे |
सामग्री:
१) एक बीजी आदमी २) आप के पास पूरा समय ३) उल जुलूल बातों का स्टॉक लगभग ५-६ घंटे का |
अब पकाने की विधि को विस्तार पूर्वक बताते हैं | हाँ तो अब जिसको पकाना है उस आदमी को बिना सिंग पुँछ की बात बतानी शुरू कीजिये, पकाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की बातों की आंच को इस तरह गोल गोल दें की बात का कुछ खुलासा न हो|

अगर आदमी बिच बिच में कहने लगे यार क्या बात कर रहे हो कुछ समझ में नहीं आ रहा है, तो समझिये की थोडा थोडा पक रहा है| उसकी बात को नजरअंदाज करते हुए अपनी बात को जारी रखिये|

जब पकने की कगार पे होगा तो हो सकता है वो अपने कान खुजाने लगे ! या कान पर हाथ फेरे ! ये पकने की निशानी है ( body language ) सो लगे रहिये|

कभी कभी आदमी ज्यादा आंच से गल भी सकता है यानी नींद भी ले सकता है, सो हिलाते रहिये सोने मत दीजिये! पूरी तरह पका हुआ आदमी गुस्सा भी हो सकता है सो थोडी सावधानी की भी आवश्यकता है |

अब आपका आदमी पक कर तैयार है क्यूंकि आगे और बात की आंच सहने करने की क्षमता नहीं है वो उठकर बस .....यार.... बोल कर जा रहा है लेकिन छोडिये मत पीछे सी आवाज़ दीजिये हेल्लो.... हेल्लो... टिप्पणी दे कर जाइए .... अगर पक गए तो ...वरना आगे लिखूंगा...... उसको पढियेगा.....

Monday, November 2, 2009

शो करते वक़्त जब मैं रो पड़ा!!!!

शिरिंग पर लिखा गया लेख हटा दिया गया है !!! मैं नहीं चाहता शिरिंग पढ़े और वो दुखी हो!! क्योंकि उसे पता चल चुका है मैंने ब्लॉग मैं कुछ लिखा है !!! इसलिए ये कमेन्ट तो कम से कम उसे दिलाशा देंगे आत्म संचार करेंगे !!!!!