Friday, June 28, 2013

एक बार फिर फङफङाना है...

सोचता हूँ बहुत दिन धकक्के खा लिया क्यूँ ना वापस आया जाए | मेरे में कुछ नहीं तो कम से कम बुद्धि जिव है उनकी संगत तो करें| ताउजी ताईजी  भी काफी नाराज हो गए होंगे, और वो मूंछो वाले भाई जी (ललित शर्मा जी )  ) तो लट्ठ ले कर तैयार खड्डे होंगे की मुरारिया कभी तो आवेगा |
अगर बाल बाल बच   भी गए तो लाल बाल गोपाल नहीं छोड़ने वाले अंग्रेजी मुक्के मारेंगे |उड़न तश्तरी में बिठा के पता नहीं कौन कौन से एक्सपेरिमेंट करेंगे |पहले शास्त्री जी से परमिशन भी तो लेनी पड़ेगी |इरफान भाई ने लगायी है ये वापस आने वाली आग|
अब एक ही कर्णधार है जो सबको मना सके अविनाश दादा |    मेरा मन अब फेसबुक में नहीं लगता | अब तो यहीं   संतोष  है |यहाँ कम से कम  कानूनी सलाह मशविरा तो दिनेशजी  के साथ किया जा सकता है | बाहर कहीं कोई भाई महफूज नहीं है | पता नहीं कौन किस को कब काजल लगा जाए | जो है सो यही है | भाटियाजी अनिलजी सब  बुद्धि   प्रवीण लोग यही हैं |

2 comments:

  1. Ab in sabse kharij hoke aage badhiye to ham tipiyane ke liye phir hazir honge!Swagat hai!

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आपके लिए ही लिखा है आप ने टिपण्णी की धन्यवाद !!!